Telegram में विज्ञापन को सही तरीके से लेबल कैसे करें: भारत के नियम और उदाहरण

Telegram में विज्ञापन की लेबलिंग: ASCI और CCPA के नियमों के अनुसार प्रमोशनल पोस्ट को सही तरीके से कैसे लेबल करें, उदाहरणों और आम गलतियों के साथ।
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भारत में Telegram पर विज्ञापन अब 'ग्रे' बाज़ार नहीं रहा। जून 2022 में केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने भ्रामक विज्ञापनों और एंडोर्समेंट पर दिशानिर्देश जारी किए, और जनवरी 2023 में उपभोक्ता मामलों के विभाग ने इन्फ़्लुएंसर्स के लिए "Endorsement Know-hows" जारी कीं। अब विज्ञापन करने वाले हर व्यक्ति को पारदर्शिता बरतनी होती है, और सबसे अहम — पेड प्रमोशन को साफ़ तौर पर विज्ञापन बताना ज़रूरी है। हाँ, भले ही आपने किसी ब्लॉगर के साथ दोस्ती में कुछ प्रमोट किया हो या मुफ़्त प्रोडक्ट के बदले पोस्ट डाली हो — यह सब इन नियमों, ASCI (भारतीय विज्ञापन मानक परिषद) के दिशानिर्देशों और Telegram पर सुरक्षित विज्ञापन की बुनियादी शर्तों के दायरे में आता है।

आइए समझते हैं कि Telegram पर विज्ञापन की लेबलिंग का मतलब क्या है, यह क्यों ज़रूरी है, लेबलिंग के सभी ज़रूरी हिस्से सही तरीके से कैसे दिखाएँ, Telegram पर विज्ञापन लेबल करते समय आमतौर पर कौन-सी गलतियाँ होती हैं और नियम न मानने पर क्या होता है। सब कुछ काम की बात — उदाहरणों, स्टेप-बाय-स्टेप निर्देशों और आम उल्लंघनों के विश्लेषण के साथ।

विज्ञापन की लेबलिंग क्या है और यह क्यों ज़रूरी है?

लेबलिंग एक साफ़ निशान है, जो उपयोगकर्ता को बताता है कि वह विज्ञापन सामग्री देख रहा है। आदर्श रूप से Telegram पर विज्ञापन की लेबलिंग साफ़ दिखने वाली, समझ में आने वाली और नियमों के मुताबिक होनी चाहिए।

असल में यह विज्ञापन को सामान्य कंटेंट से अलग करने, ऑडियंस का भरोसा बढ़ाने और विज्ञापनदाता से लेकर Telegram चैनल के मालिक तक, प्रक्रिया के सभी पक्षों को सुरक्षित रखने का तरीका है। भारत में इसका कानूनी आधार उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 है, जिसके तहत CCPA भ्रामक विज्ञापनों पर कार्रवाई करता है, जबकि ASCI के इन्फ़्लुएंसर दिशानिर्देश (2021 से लागू) डिजिटल मीडिया पर विज्ञापन की पहचान बताने के नियम तय करते हैं। Telegram चैनलों के विज्ञापनों समेत सारी ऐसी सामग्री, जिसके पीछे ब्रांड से कोई संबंध है, साफ़ तौर पर लेबल होनी चाहिए।

लेबलिंग में क्या शामिल है?

  • यह बताना कि यह विज्ञापन है ('Advertisement', 'Ad', 'Sponsored', 'Collaboration', 'Partnership' या 'Free gift' जैसे शब्दों के साथ)।
  • ब्रांड के साथ अपने "मटीरियल कनेक्शन" का खुलासा — यानी पैसे, मुफ़्त प्रोडक्ट, छूट, यात्रा, रिश्तेदारी या नौकरी जैसा कोई भी संबंध, जो आपकी राय पर असर डाल सकता है।
  • विज्ञापनदाता की जानकारी (ब्रांड या कंपनी का नाम)।
  • यह शर्त कि विज्ञापन में किए गए सभी दावे सच्चे हों और उनके सबूत मौजूद हों।

भारत में विज्ञापन की कोई सरकारी रिपोर्टिंग नहीं होती, लेकिन ASCI या CCPA के पास शिकायत होने पर आपको ब्रांड के साथ समझौता और विज्ञापन के दावों के सबूत दिखाने पड़ सकते हैं। इसलिए हर कैंपेन का रिकॉर्ड रखना ज़रूरी है।

मक़सद है जवाबदेही, पारदर्शिता और उपभोक्ताओं को भ्रामक विज्ञापनों से बचाना। यह सब भारत में डिजिटल विज्ञापन को ज़्यादा ज़िम्मेदार बनाने के बड़े ढाँचे के भीतर काम करता है। शर्तें पूरी न करने और Telegram पर विज्ञापनों को लेबल न करने पर विज्ञापनदाता और प्रचार करने वाले, दोनों की ज़िम्मेदारी बनती है: जुर्माना, विज्ञापन हटाने का आदेश या ASCI की ओर से सार्वजनिक कार्रवाई।

क्या TG में हर विज्ञापन को लेबल करना ज़रूरी है?

छोटा जवाब — हाँ, लगभग हर विज्ञापन को। नियम Telegram के लिए कोई छूट नहीं देते: अगर ब्रांड के साथ आपका कोई संबंध है और आप उसका प्रचार कर रहे हैं, तो पोस्ट को लेबल करना होगा, फ़ॉर्मेट या शर्तें चाहे जो हों।

इन्हें लेबल करना ज़रूरी है:

  • पेड विज्ञापन Telegram Ads के ज़रिए (यहाँ "Sponsored" लेबल अपने-आप लगता है);
  • विज्ञापन पोस्ट TG चैनलों में, ब्लॉगर या एडमिन के साथ समझौते से;
  • बार्टर — जब आप ब्लॉगर को प्रोडक्ट भेजते हैं और वह उस पर पोस्ट करता है;
  • आपसी प्रमोशन — अगर आप किसी को प्रमोट करते हैं और वह आपको;
  • ख़ुद का प्रचार — अपने ही प्रोडक्ट्स के बारे में पोस्ट, अगर ऑडियंस को साफ़ पता न हो कि प्रोडक्ट आपका है।

बात यह है: अगर पोस्ट का मक़सद प्रचार है और इससे किसी को फ़ायदा है — तो उसे लेबल करना होगा। भले ही आपने बस इतना लिखा हो 'दोस्तों, मेरे जानने वाले ने सैलून खोला है, ज़रूर जाइए', और बदले में आपको मुफ़्त सेवा मिली हो — यह भी विज्ञापन ही है।

किन्हें लेबल करने की ज़रूरत नहीं?

  • बिना किसी व्यावसायिक संबंध वाली निजी पोस्ट;
  • ऐसा कंटेंट, जिसमें सामान, सेवाओं या ब्रांड्स के प्रचार के संकेत न हों;
  • ख़बरों पर चर्चा, अगर इसके लिए आपको पैसे या कोई दूसरा फ़ायदा नहीं मिल रहा।

सबसे अहम कसौटी: क्या लेखक और ब्रांड के बीच कोई ऐसा संबंध है, जिसकी जानकारी ऑडियंस को होनी चाहिए? अगर हाँ — तो साफ़ लेबल और ब्रांड का नाम होना चाहिए।

Telegram Ads में लेबलिंग

अगर आप आधिकारिक Telegram Ads प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए विज्ञापन चलाते हैं (इसके बारे में हमारी Telegram Ads गाइड में विस्तार से बताया गया है), तो लेबलिंग अपने-आप प्रक्रिया का हिस्सा बन जाती है। स्पॉन्सर्ड मैसेज पर Telegram ख़ुद "Sponsored" का निशान लगाता है — आपको बस विज्ञापनदाता की जानकारी सही भरनी होती है और यह पक्का करना होता है कि विज्ञापन का कंटेंट नियमों के मुताबिक है।

यह ऐसे काम करता है:

  1. अपने Telegram Ads अकाउंट में विज्ञापन बनाएँ और उसका टेक्स्ट तैयार करें।
  2. जाँच लें कि टेक्स्ट Telegram Ads की नीतियों और ASCI कोड के अनुरूप है (कोई भ्रामक या बढ़ा-चढ़ाकर किया गया दावा नहीं)।
  3. विज्ञापनदाता की जानकारी सही-सही भरें — अगर प्लेटफ़ॉर्म माँगे, तो:
    • कंपनी या व्यक्तिगत उद्यमी का आधिकारिक नाम,
    • टैक्स से जुड़ी जानकारी,
    • प्लेटफ़ॉर्म द्वारा माँगी गई दूसरी जानकारी।

इसके बाद Telegram विज्ञापन को "Sponsored" के निशान के साथ दिखाता है। लेकिन विज्ञापन में किए गए दावों की ज़िम्मेदारी फिर भी विज्ञापनदाता की ही रहती है।

ज़रूरी: अगर आप Telegram Ads के साथ-साथ इन्फ़्लुएंसर्स के ज़रिए भी विज्ञापन दे रहे हैं, तो वहाँ लेबलिंग ख़ुद करनी होगी, जिसके बारे में हम आगे बताएँगे। Telegram Mini Apps में आप ज़्यादा एंगेजमेंट वाले विज्ञापन आसानी से लागू कर सकते हैं।

TG चैनलों में लेबलिंग

अगर आप सीधे Telegram चैनलों के मालिकों के साथ विज्ञापन कर रहे हैं, तो लेबलिंग की ज़िम्मेदारी आप दोनों की है: विज्ञापनदाता की भी और चैनल एडमिन की भी। यह सभी फ़ॉर्मेट पर लागू होता है: सामान्य पोस्ट से लेकर वीडियो क्लिप और स्टोरीज़ तक।

यहाँ Telegram का सिस्टम शामिल नहीं होता, इसलिए आपको ख़ुद सही लेबल चुनना होगा, पोस्ट को सही ढंग से तैयार करना होगा और समझौते व दावों का रिकॉर्ड रखना होगा।

मुख्य कदम:

  • चैनल के मालिक या एजेंसी के साथ लिखित समझौता करें।
  • ASCI के इन्फ़्लुएंसर दिशानिर्देश और अपने क्षेत्र के नियम (जैसे फ़ाइनेंस या हेल्थ) जाँच लें।
  • पहले से तय करें कि कौन-सा लेबल इस्तेमाल होगा: 'Ad', 'Sponsored', 'Collaboration' वगैरह।
  • पोस्ट के टेक्स्ट में लेबलिंग जोड़ें: शुरुआत में बताएँ कि यह विज्ञापन है और ब्रांड का नाम लिखें।

ज़रूरी: भले ही आप बार्टर के ज़रिए, बस "दोस्ती में" या अंदरूनी बोनस के लिए विज्ञापन कर रहे हों — अगर ब्रांड से कोई फ़ायदा मिला है, तो यह विज्ञापन है और इसे लेबल करना होगा।

टेक्स्ट पोस्ट

टेक्स्ट पोस्ट Telegram पर प्रमोशन के सबसे लोकप्रिय फ़ॉर्मेट में से एक हैं। बिना लेबल वाले विज्ञापनों के बारे में ज़्यादातर शिकायतें भी इसी तरह के कंटेंट से जुड़ी होती हैं।

सही विज्ञापन क्रिएटिव कैसा होना चाहिए:

  • बिल्कुल शुरुआत में साफ़ लिखा होना चाहिए कि यह विज्ञापन है।
  • इसके बाद विज्ञापन का टेक्स्ट सामान्य ढंग से आता है।
  • ध्यान दें: लेबल तुरंत दिखना चाहिए। इसे आख़िर में, हैशटैग की भीड़ में, तस्वीरों में या बटनों के पीछे नहीं छिपाया जा सकता — ASCI के दिशानिर्देश साफ़ कहते हैं कि लेबल शुरुआत में और ऐसी जगह हो, जहाँ उसे नज़रअंदाज़ करना मुश्किल हो।

भले ही विज्ञापन 'पहले पुरुष' में लिखा हो — उदाहरण के लिए, 'मैंने प्रोडक्ट X आज़माया और मुझे पसंद आया' — अगर इसके पीछे ब्रांड से संबंध है, तो वह विज्ञापन ही है और नियमों के दायरे में आता है।

उल्लंघन किसे माना जाता है:

  • साफ़ तौर पर नहीं बताया गया कि यह विज्ञापन है;
  • लेबल ऐसी जगह छिपा है, जहाँ उपयोगकर्ता उसे आसानी से नहीं देख पाएगा;
  • विज्ञापन क्रिएटिव को बिना लेबल के निजी राय की तरह पेश करने की कोशिश;
  • प्रोडक्ट के बारे में ऐसे दावे, जिनके सबूत नहीं हैं या जो भ्रामक हैं।

हर प्लेसमेंट में विज्ञापनदाता की जानकारी और साफ़ लेबल होना चाहिए, ताकि ऑडियंस समझ सके कि सामग्री किसके हित में है। यह उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा और Telegram पर विज्ञापन को ज़िम्मेदार बनाने का हिस्सा है।

यह सब बाज़ार को ज़्यादा पारदर्शी बनाता है और ऑडियंस का भरोसा बनाए रखने में मदद करता है।

स्टोरीज़

स्टोरीज़ भी ऐसा फ़ॉर्मेट है, जिस पर नियामकों का ध्यान रहता है। भले ही स्टोरीज़ 24 घंटे बाद गायब हो जाती हैं, अगर उनमें विज्ञापन है, तो उन्हें लेबल करना ज़रूरी है।

क्या दिखाना ज़रूरी है:

  1. शब्द "Ad" या "Sponsored" — साफ़ और बड़े अक्षरों में। बेहतर है कि इसे स्टोरी में ऊपर रखें, ताकि यह पहले ही पल से दिखे।
  2. ब्रांड का नाम — टेक्स्ट के रूप में या ग्राफ़िक में ही, ताकि साफ़ हो कि विज्ञापन किसका है।
  3. अगर स्टोरी में कई स्लाइड हैं — तो लेबल हर स्लाइड पर होना चाहिए।

ज़रूरी: लेबल सिर्फ़ लिंक में या "और पढ़ें" के पीछे रखना काफ़ी नहीं — इसे उल्लंघन माना जाता है। सारी ज़रूरी जानकारी स्टोरी में ही होनी चाहिए, ताकि उपयोगकर्ता उसे तुरंत देख सके।

वीडियो मैसेज (सर्कल)

वीडियो मैसेज या "सर्कल" (गोल वीडियो) ऐसा फ़ॉर्मेट है, जिसमें विज्ञापन को आसानी से छिपाया जा सकता है। इसी वजह से इन पर ख़ास ध्यान दिया जाता है।

अगर सर्कल में किसी ब्रांड, प्रोडक्ट, प्रोमो कोड या किसी दूसरी विज्ञापन सामग्री का ज़िक्र है — तो उसे लेबल करना होगा।

सही लेबलिंग कैसी होती है:

  1. वीडियो में बोलकर बताना — ऐसा वाक्य कहें:
    «यह वीडियो ब्रांड X के साथ पेड पार्टनरशिप है».
  2. स्क्रीन पर टेक्स्ट — वीडियो में सीधे लेबल जोड़ें; ASCI के अनुसार 15 सेकंड तक के वीडियो में यह कम से कम 2 सेकंड दिखना चाहिए: «Ad | ब्रांड X»
  3. सर्कल के साथ टेक्स्ट — इसमें भी ऐसा वाक्य डालना ज़रूरी है: «Ad: ब्रांड X के साथ पेड पार्टनरशिप»

क्या नहीं करना चाहिए:

  • यह न बताना कि वीडियो विज्ञापन है;
  • लेबल सिर्फ़ पिन की गई पोस्ट या लिंक में रखना;
  • जानकारी को "और पढ़ें" के नीचे या कमेंट्स में छिपाना।

बिना लेबल वाली विज्ञापन पोस्ट सीधे शिकायतों और जुर्माने तक ले जाती हैं। भले ही वे "बस कुछ सेकंड की और मज़े के लिए" हों।

बार्टर

बहुत से लोग अब भी सोचते हैं कि अगर विज्ञापन के लिए पैसे नहीं दिए गए, बल्कि वह "एहसान के तौर पर" या तोहफ़े के बदले किया गया, तो उसे बिना लेबल के किया जा सकता है। दुर्भाग्य से, ऐसा नहीं है।

बार्टर भी विज्ञापन का समझौता है, बस इसमें पैसे से भुगतान नहीं होता। मुफ़्त प्रोडक्ट भी "मटीरियल कनेक्शन" है, इसलिए लेबलिंग ज़रूरी है। साथ ही, आयकर अधिनियम की धारा 194R के तहत साल में ₹20,000 से ज़्यादा के ऐसे फ़ायदों पर ब्रांड को TDS काटना होता है।

ऐसी स्थितियों के उदाहरण, जिनमें लेबल ज़रूरी है:

  • आपने ब्लॉगर को प्रोडक्ट भेजा — उसने रिव्यू पोस्ट किया;
  • चैनल ने मुफ़्त भागीदारी के बदले किसी इवेंट का प्रचार किया;
  • इन्फ़्लुएंसर ने प्रोमो कोड के साथ स्टोरी डाली, क्योंकि "आपको तोहफ़ा मिला था।"

लेबल कैसे करें:

  1. ब्रांड के साथ शर्तें लिखित में तय करें;
  2. टेक्स्ट, स्टोरी या वीडियो में "Free gift" या "Ad" जैसा लेबल जोड़ें;
  3. ब्रांड का नाम बताएँ (आमतौर पर — प्रोडक्ट भेजने वाली कंपनी)।

भुगतान का तरीका मायने नहीं रखता। मायने यह रखता है कि क्या कोई फ़ायदा है और क्या प्रोडक्ट का प्रचार हो रहा है।

आपसी प्रमोशन

आपसी प्रमोशन तब होता है, जब दो चैनल समझौते से एक-दूसरे का प्रचार करते हैं। पैसे नहीं दिए जाते, लेकिन ऑडियंस और रीच का आदान-प्रदान होता है। यानी यह भी एक फ़ायदा है। और हाँ, इसे भी लेबल करना बेहतर है।

नियम क्या कहते हैं:

अगर पोस्ट किसी समझौते के तहत की गई है और उससे दोनों पक्षों को फ़ायदा है, तो भुगतान का तरीका चाहे जो हो, यह संबंध ऑडियंस को बताया जाना चाहिए। भले ही यह सिर्फ़ पोस्ट्स का आदान-प्रदान हो — दोनों पोस्ट प्रचार ही मानी जाती हैं।

क्या करें:

  • हर पोस्ट में साफ़ बताएँ कि यह आपसी प्रमोशन है;
  • टेक्स्ट की शुरुआत में "Collaboration" या "Partnership" लिखें;
  • बताएँ कि प्रचार किसका है (अगर ज़रूरी हो — उदाहरण के लिए, अगर चैनल को किसी कंपनी की ओर से प्रमोट किया जा रहा है)।

उदाहरण: आप डिज़ाइन पर चैनल चलाते हैं। आपका दोस्त मार्केटिंग पर चैनल चलाता है। सब्सक्राइबर्स बाँटने के लिए आप अपनी पोस्ट्स में एक-दूसरे का ज़िक्र करते हैं। असल में यह आपसी प्रमोशन है। और अगर आप इसे लेबल नहीं करते, तो ऑडियंस का भरोसा खोने और शिकायतों का जोखिम रहता है।

निजी सिफ़ारिशें

अब आता है सबसे पेचीदा हिस्सा। निजी सिफ़ारिश तब होती है, जब लेखक अपने अनुभव से बात करता है और लगता है कि वह ईमानदारी से अपनी राय दे रहा है: "मैं प्रोडक्ट X इस्तेमाल करता हूँ और बहुत संतुष्ट हूँ।" लेकिन अगर इसके पीछे कोई व्यावसायिक समझौता है, तो यह विज्ञापन है, और इसे लेबल करना ज़रूरी है। Endorsement Know-hows के अनुसार आप सिर्फ़ उसी प्रोडक्ट को एंडोर्स करें, जिसे आपने ख़ुद इस्तेमाल किया हो।

नियमों को इससे मतलब नहीं कि पोस्ट किस लहजे में लिखी गई है — वे तथ्यों को देखते हैं:

  • क्या कोई प्रचार संदेश था?
  • क्या लेखक को कोई बदला मिला (पैसे, सामान, सेवाएँ);
  • क्या इससे प्रचारित ब्रांड को फ़ायदा है?

अगर किसी एक का भी जवाब "हाँ" है, तो यह विज्ञापन है, और इसके लिए ज़रूरी है:

  • "Sponsored" या "Paid partnership" जैसे शब्द;
  • ब्रांड के साथ संबंध का साफ़ खुलासा;
  • विज्ञापनदाता की जानकारी।

क्या नहीं करना चाहिए:

  • विज्ञापन को 'निजी अनुभव' के रूप में छिपाना;
  • बिना साफ़ लेबल के फ़ॉलोअर्स, कर्मचारियों वगैरह के नाम से पोस्ट करना;
  • यह सोचना कि 'लेखक का लाइफ़ हैक' विज्ञापन नहीं है, जबकि उसके लिए पैसे दिए गए थे; फ़ाइनेंस और हेल्थ जैसे क्षेत्रों में तो ज़रूरी योग्यता या रजिस्ट्रेशन (जैसे SEBI) के बिना सलाह देना भी जोखिम भरा है।

ख़ुद का प्रचार

'लेकिन यह मेरा चैनल है, मैं अपने ही प्रोडक्ट वाली पोस्ट को लेबल क्यों करूँ?' — TG चैनल मालिकों का यह सबसे आम सवाल है। और यह तर्कसंगत भी है। अगर ऑडियंस को साफ़ पता है कि प्रोडक्ट आपका है, तो अलग से "Ad" लेबल हमेशा ज़रूरी नहीं होता।

लेकिन अगर आप अपनी सेवाओं, कोर्स, प्रोडक्ट्स या प्रोजेक्ट्स का प्रचार ऐसे करते हैं, जैसे यह किसी तटस्थ व्यक्ति की राय हो, तो यह भ्रामक माना जा सकता है। और विज्ञापन के सभी दावे — जैसे "100% नौकरी की गारंटी" — सच्चे और साबित करने लायक होने चाहिए।

क्या करें?

  1. अपना संबंध साफ़ बताएँ। लिखें कि यह आपका अपना प्रोडक्ट या सेवा है।
  2. ब्रांड की तरह ज़िम्मेदारी लें। यानी विज्ञापन के हर दावे के लिए आप ही विज्ञापनदाता के रूप में जवाबदेह हैं।
  3. ज़रूरी विवरण जोड़ें: "मेरा अपना कोर्स। Ad: 'Vector Academy'"

ख़ुद के प्रचार में लेबल की चिंता कब नहीं?

जब चैनल किसी सामान, सेवा या तीसरे पक्ष के प्रोजेक्ट का प्रचार नहीं करता और सभी पोस्ट पूरी तरह निजी हैं, बिना किसी व्यावसायिक मक़सद के।

Telegram चैनल में विज्ञापन को लेबल कैसे करें: स्टेप-बाय-स्टेप गाइड

अगर आप Telegram चैनल में ख़ुद विज्ञापन लगा रहे हैं — चाहे वह नेटिव विज्ञापन हो, स्टोरी, सर्कल या सिर्फ़ टेक्स्ट पोस्ट — प्रक्रिया हमेशा एक जैसी होती है। ये रहे चार कदम, जो सब कुछ सही करने और जुर्माने से बचने में मदद करेंगे।

कदम 1. विज्ञापनदाता के साथ समझौता करें

भले ही आपने ज़ुबानी बात तय की हो — आदर्श रूप से लिखित समझौता होना चाहिए। यह हो सकता है:

  • विज्ञापन प्लेसमेंट का सामान्य अनुबंध;
  • ऑफ़र, अगर आप किसी एक्सचेंज के ज़रिए काम कर रहे हैं;
  • या शर्तों की पुष्टि करने वाला ईमेल पत्राचार (हालाँकि यह जोखिम भरी सीमा पर है)।

समझौते में यह भी लिखें कि पोस्ट पर कौन-सा लेबल लगेगा और विज्ञापन के दावों की पुष्टि कौन करेगा। शिकायत होने पर यही दस्तावेज़ आपकी सुरक्षा करेगा।

कदम 2. ASCI और अपने क्षेत्र के नियम जाँचें

ASCI भारत में विज्ञापन की स्व-नियामक संस्था है, जिसके दिशानिर्देशों को CCPA के नियमों का भी आधार माना जाता है। इन्हें जाँचने से मदद मिलती है:

  • सही लेबल चुनने में,
  • ऐसे दावों से बचने में, जो भ्रामक माने जा सकते हैं,
  • ख़ास क्षेत्रों के अतिरिक्त नियम समझने में।

कुछ क्षेत्रों के अपने नियम हैं: फ़ाइनेंस (SEBI), हेल्थ और ऑनलाइन गेमिंग (Promotion and Regulation of Online Gaming Act, 2025 के तहत पैसे वाले ऑनलाइन गेम्स के विज्ञापन पर रोक)। विज्ञापन शुरू करने से पहले इन्हें ज़रूर देखें।

कदम 3. सही लेबल चुनें और उसे विज्ञापन सामग्री में डालें

तय करें कि आपके मामले में कौन-सा लेबल सही है: 'Ad', 'Sponsored', 'Collaboration', 'Partnership' या 'Free gift'। इसे यहाँ डालना ज़रूरी है:

  • पोस्ट के टेक्स्ट में (शुरुआत में);
  • वीडियो में — सिर्फ़ डिस्क्रिप्शन में नहीं, बल्कि वीडियो के भीतर भी;
  • स्टोरी या वीडियो में — सीधे विज़ुअल में या आवाज़ में।

लेबल के बिना या छिपे हुए लेबल के साथ प्रचार अधूरा खुलासा माना जाता है। और यह उल्लंघन है।

कदम 4. रिकॉर्ड रखें

आख़िरी कदम — दस्तावेज़। भारत में कोई सरकारी विज्ञापन रजिस्टर नहीं है, लेकिन शिकायत होने पर ये जानकारियाँ काम आएँगी:

  • प्रकाशन का लिंक;
  • ब्रांड के साथ समझौता;
  • प्लेसमेंट की तारीख़ और अवधि;
  • विज्ञापन के दावों के सबूत वगैरह।

यह रिकॉर्ड ASCI, CCPA और विज्ञापनदाता, तीनों के सामने आपकी सुरक्षा करेगा।

सही और गलत लेबलिंग के उदाहरण

सिद्धांत अच्छा है, लेकिन व्यवहार में गलतियाँ अक्सर बारीकियों पर ध्यान न देने से होती हैं। आइए देखें सही लेबलिंग कैसे करें, और किन चीज़ों से बिल्कुल बचना चाहिए। सही लेबलिंग के उदाहरण

टेक्स्ट पोस्ट:

Ad | ब्रांड X के साथ पेड पार्टनरशिप

हमने Stories के लिए नई एनालिटिक्स सेवा आज़माई। हमें यह पता चला…
— सब कुछ सही फ़ॉर्मेट में है: "Ad" शब्द मौजूद है, ब्रांड का नाम है और लेबल शुरुआत में रखा गया है।

स्टोरीज़:

पहली स्लाइड पर — यह लिखा है:

  • "Sponsored | ब्रांड X" लिखावट पढ़ने में आसान है, बैकग्राउंड से अलग दिखती है और 1 सेकंड बाद गायब नहीं होती।
  • लेबल को कैप्शन में भी दोहराया जा सकता है।
  • वीडियो सर्कल:

स्क्रीन पर लिखा है:

  • «Ad: यह वीडियो ब्रांड X के साथ पेड पार्टनरशिप है» वीडियो की शुरुआत में आवाज़ में भी यही दोहराया जाता है।
  • सर्कल के कैप्शन में भी ऐसा ही नोट है।
  • आम गलतियाँ

«Ad» का लेबल पोस्ट के आख़िर में है — उपयोगकर्ता उसे तुरंत नहीं देख पाते।

  • लेबल लिंक, पिन या हैशटैग की भीड़ में छिपा है — यह उल्लंघन है; इसे सामान्य टेक्स्ट में साफ़ लिखा होना चाहिए।
  • पोस्ट निजी राय जैसी दिखती है, लेकिन असल में यह बिना लेबल वाला नेटिव इंटीग्रेशन है।
  • स्टोरीज़ बिना किसी लेबल के बनाई गई हैं, जबकि उनमें प्रोमो कोड और ब्रांड का ज़िक्र है।
  • लेबल सिर्फ़ वीडियो के डिस्क्रिप्शन में है, वीडियो में नहीं — इसे अधूरा खुलासा माना जाता है।
  • याद रखना ज़रूरी है: ASCI डिजिटल विज्ञापनों पर लगातार नज़र रखता है, उपयोगकर्ताओं की शिकायतें भी लेता है और नियम न मानने वाले इन्फ़्लुएंसर्स के नाम सार्वजनिक करता है।

उल्लंघन के जोखिम और नतीजे

बहुत से लोग अब भी लेबलिंग को औपचारिकता मानते हैं: "हमें कौन जाँचेगा?" लेकिन यह गलती है। अनुभव बताता है कि भारत में ASCI, CCPA और टैक्स विभाग, सभी डिजिटल विज्ञापन पर गंभीरता से ध्यान दे रहे हैं, और Telegram भी इसका अपवाद नहीं है।

अगर आप विज्ञापन को सही ढंग से लेबल नहीं करते, तो यह हो सकता है:

विज्ञापनदाताओं और चैनलों पर जुर्माना

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत CCPA भ्रामक विज्ञापन के लिए निर्माता, विज्ञापनदाता और एंडोर्स करने वाले, तीनों पर कार्रवाई कर सकता है।

संभावित दंड:

  • पहले उल्लंघन पर — ₹10 लाख तक का जुर्माना;
  • दोबारा उल्लंघन पर — ₹50 लाख तक का जुर्माना;
  • एंडोर्स करने वाले पर — 1 साल तक किसी भी प्रचार पर रोक। दोबारा उल्लंघन पर यह रोक 3 साल तक की हो सकती है।

पोस्ट या पूरे कैंपेन का हटना

CCPA भ्रामक विज्ञापन को बंद करने या बदलने का आदेश दे सकता है, और ASCI भी विज्ञापन हटाने या बदलने को कह सकता है। प्लेटफ़ॉर्म अपनी नीतियों के तहत ऐसे कंटेंट को हटा भी सकते हैं।

टैक्स से जुड़ी दिक़्क़तें

विज्ञापन से होने वाली आय — पैसे या सामान, दोनों रूपों में — टैक्स के दायरे में आती है, और बड़ी आय पर GST रजिस्ट्रेशन भी ज़रूरी हो सकता है। बिना रिकॉर्ड के आयकर विभाग सवाल पूछ सकता है:

  • आय किस आधार पर मिली,
  • भुगतान किसने किया,
  • क्या कोई समझौता है,
  • विज्ञापनदाता कौन है।

यह सब जाँच और अतिरिक्त टैक्स की माँग का आधार बन सकता है।

पार्टनर्स और ग्राहकों के भरोसे का नुकसान

बिज़नेस के लिए बिना लेबलिंग के काम करना साख का जोखिम है। ग्राहक, ख़ासकर बड़े ब्रांड, नियमों के सख़्त पालन की माँग तेज़ी से बढ़ा रहे हैं। पारदर्शिता की कमी संभावित पार्टनर्स की नज़र में नकारात्मक बात है।

निष्कर्ष

Telegram में विज्ञापन की लेबलिंग अब विकल्प नहीं, बल्कि ज़रूरी शर्त है। नियम साफ़ हैं: अगर आप पोस्ट, स्टोरी, सर्कल या किसी भी दूसरे फ़ॉर्मेट के ज़रिए किसी ब्रांड का प्रचार करते हैं और उससे आपको कोई फ़ायदा मिला है — तो शुरुआत में ही साफ़ बताएँ कि यह विज्ञापन है, ब्रांड का नाम लिखें, सिर्फ़ सच्चे दावे करें और समझौते का रिकॉर्ड रखें।

पहली नज़र में यह जटिल लग सकता है। लेकिन असल में इसे एक बार समझकर प्रक्रिया सेट कर लेना काफ़ी है। इसके अलावा, ASCI की वेबसाइट पर विस्तृत दिशानिर्देश और उदाहरण मौजूद हैं।

यह क्यों ज़रूरी है:

  • जुर्माने और जाँच से बचने के लिए;
  • ऑडियंस का भरोसा बनाए रखने के लिए;
  • TG में अपना प्रमोशन भरोसे के साथ बढ़ाने के लिए।

और अगर आप नियमित रूप से TG में टार्गेटेड विज्ञापन चलाते हैं या ऐसा चैनल संभालते हैं, जो ब्रांड्स के साथ काम करता है — तो लेबलिंग को जितनी जल्दी हो सके, अपने काम का हिस्सा बना लें।

P.S. अगर आप Telegram में विज्ञापन के साथ काम करते हैं और नई परिस्थितियों में प्रमोशन को बेहतर समझना चाहते हैं — तो अपडेट्स के लिए जुड़े रहें Adsgram.ai से। हम बताते हैं कि विज्ञापन कैंपेन का असर बनाए रखते हुए नियमों के मुताबिक कैसे काम करें। Telegram में विज्ञापन की लेबलिंग: निर्देश और उदाहरण

Elizaveta Bydanova
Elizaveta Bydanova
टीम लीड बिजनेस डेवलपमेंट, AdsGram

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